घटियारी का यह प्राचीन शिव मंदिर गंडई के पास बिरखा गांव के पास स्थित है। कल्चुरी कालीन 10वीं-11वीं ई. में निर्मित यह मंदिर पुरातत्व वेत्ताओं के अनुसार भोरमदेव के समकालीन है तथा कवर्धा के फणि नागवंशी राजाओं द्वारा निर्मित प्रतीत होता है। राज्य सरकार द्वारा सन 1978-79 में यहां उत्खनन कार्य किया गया। जिसमें सैकड़ो की संख्या में कलात्मक प्रस्तर मूर्तियां व मंदिरों के वास्तु खंड प्राप्त हुए हैं। बिखरे हुए अवशेषों से यह अनुमान लगाया जा सकता है निश्चित रूप से यह मदिर भोरमदेव की तरह भव्य, विशाल और कलात्मकता से पूर्ण रहा होगा। यहां नंदी की विशाल मूर्ति है जिसके पीठ पर बने घंटियों का शिल्प दृश्य बहुत सुंदर है। यहां आप बहुत ही सुंदर ढंग से बने प्रस्तर मूर्तियों और पूरे परिसर में बिखरे मंदिर के वस्तुखंड को देख सकते हैं। इस मंदिर के बारे में विस्तृत जानकारी छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पीसी लाल यादव द्वारा रचित पुस्तक "जहां पाषाण बोलते है" में पढ़ सकते है।




















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